• heartslines_latasworld 6w

    पर न मिलता उस टूटे टुकड़े का जोड़ कही मुझे

    उठते बेचैन सवाल, आधे टुकड़े को हाथ में ले

    आकांक्षाकुटीर से झिरी खोल बाहर को देखता

    बरसों बीते आधे टुकड़े को जो पूरा करता दूजा

    मेरे झोपड़े की झिरी से बाहर से आ नहीं मिला

    शायद मन का मेरे टुटा हुआ अधूरा हिस्सा था

    अपने टुकड़े में मुझे मेरा टुटा अक्स दिखता था

    झिरी से झांक गुजरते राहगीर को रोक ; मिलता

    पर न मिलता उस टूटे टुकड़े का जोड़ कही मुझे

    कैसे मिलता मुझसे अलग वो मेरा टुटा हिस्सा था

    उभरा खुद के टुकड़े में भला खुद से कैसे मिलता