• _aradhana 5w

    Menstruation

    वह तो अभी नादान थी,
    माहवारी के किस्से से अंजान थी ,
    देखकर अचानक नीचे,
    सहम कर हो गयी वह पीछे॥

    तब माँ ने बताया, यह है माहवारी,
    इससे नहीं है कोई परेशानी भारी,
    और उसने समझाया
    यह न तो पाप है, न कोई अभिशाप है,
    न ही कोई शर्म की बात है,
    यह सिर्फ लाल रक्त है,
    जो बंधन है स्त्री जीवन का॥

    पर जब समाज ने देखा उसके हाथ में काली थैली,
    तो यह बात हर ओर आग की तरह फैली,
    अरे किसने दिया तुम्हें ये अधिकार,
    कि उन दिनों करो तुम एक लड़की का तिरस्कार॥

    आखिर समाज का यह कैसा है चरित्र,
    क्यूँ उन दिनों कहलाई एक लड़की अपवित्र?

    ©_aradhana