• mrigtrishna 50w

    पहले अच्छा दिखने के लिए रोज़ लिबास बदलने पड़ते थे,
    सुंदर दिखने के लिए रोज़ एक नया नक़ाब ओढ़ना पड़ता था,
    फिर भी सच्चाई के साथ आईने का सामना नहीं कर पाता था,
    आईना न ही मुझे अच्छा बताता था न ही सुंदर दिखा पाता था,
    एक दिन झुंझलाकर हर लिबास में आग लगा दी,
    हर नक़ाब को उतार फैंका, सुंदर तो अब भी नहीं हूं,
    अच्छा भी नही पर अब रोज़ अपने आप से मिलने में घबराहट नहीं होती।
    ©mrigtrishna