• babulbanarsi 23w

    पांचाली !

    रुको ! पांचाली !
    नहीं केशव ! मुझे मत रोको ! मुझे मेरे पतियों के साथ जाना है !
    वो सब अननंत राह पर जा रहे हैं, वो फिर कभी नहीं लौटेंगे !
    जानती हूं और इसी लिए जाना चाहती हूं।कम से कम ये तो कोयी नहीं कहेगा कि द्रौपदी ने अपने पतियो को छोड़ दिया। जब कि मैं तो अर्जुन की ब्याहता थी मगर माॅ के आदेश पालक बेटो ने मुझे बांट लिया। मैं अपने दिल पर पर पत्थर रख कर अपना धर्म निभाती रही।
    एक बात बताओ कान्हा " क्या सुभद्रा के साथ अगर एैसा होता तो तुम बर्दाश्त कर लेते ? तुम तो युगान्तर हो, तीनो लोको की पल पल की खबर रखते हो। फिर तुमने दुर्ययोधन का वध उस समय क्यो नहीं किया जब वो मुझे दुश्शासन के हाथो निर्वस्त्र करवा रहा था "?
    उसका समय तब पूरा नहीं हुआ था
    तुम्ही राम थे ! है न ! तब जब तुमको मालूम था कि सीता को रावण हर ले जायेगा, तब भी तुम कुछ नही किए ? तुमको हर पल की खबर रहती है मगर तुम कुछ नहीं करते ?
    मैं सब कुछ जानता हूं । पर समय के हाथो बंधा हूं द्रौपदी ।
    सुनो मोहन ! तुम और तुम्हारा समय बस चुपचाप मूक हो कर घटनाओ को देखता रहेगा तो हर युग में सीता का हरण होता रहेगा। हर युग में द्रौपदी पांचाली कहलाती रहेगी। हर युग में बहू बेटियों की आबरू लुटती रहेगी। अब मुझे मत रोको किशन, अगर मै रुक गयी तो पता नही आगे कितने नारीभक्षियो से सामना होगा।
    अगर तुम समय से बंधे हो तो कम से कम समय से पहले अबलाओं को सचेत तो कर ही सकते हो ?
    शायद तुम ठीक कह रही हो। जाओ समय तुम्हारा इंतजार कर रहा है। और पांचाली चली गयी।
    आज भी केशव अपने बनाए हुए, रचे हुए समय काल से बंधे है वर्ना निर्भया से लेकर दूधमुंही बच्चियां हैवानियत का शिकार नहीं होती।
    © बाबुल बनारसी।