• sumansigh 10w

    एक ग़ज़ल........
    आइना.......

    हर हकीकत बयां करता आइना ।
    मूंद ले आंखें ग़र ,करे क्या आइना

    लाख बदले रूप अपना आदमी
    चेहरा .....पहचान लेता आइना।

    क्यूं मुझे सच जानने की तिश्नगी
    दिल मिरा जब तोड़ देगा आइना ।

    आज फिर बेची गई मेरी वफ़ा
    रह गया बेबस ठगा सा आइना ।

    वक़्त के हाथों कहीं जो बिक गया
    आज सूरत वही ..मांगता आइना ।

    राज कोई राज रहता ही नहीं
    भेद सारे ..खोल देता आइना ।

    चांद खोया खो गई है चांदनी
    बेबसी के अश्क़ पीता आइना।

    एक साये में ढका ..सा चेहरा
    है नज़र धुंधली कि धुंधला आइना ।।
    .................सुमन सिंह ...................
    .............स्वरचित / मौलिक ...............