• harish_verma 9w

    पटरी ट्रैन की part 2

    इन्ही सब के बिच न जाने क्यों उसको ऐसा लग रहा था की जरूर उसका उस लड़की से कोई रिश्ता है या दोस्ती बहुत पुरानी है ,

    इतना कुछ "सभ्य " के मन मैं चल ही रहा था की रिक्शे वाला बोला भाई क्या हुआ मंज़िल आ गयी ..

    "सभ्य " इधर उधर देखना लगा वो लड़की वंहा थी ही नहीं फिर वो रिक्शे से उतरा और प्रोग्राम मैं पंहुचा अपने बैग और आपने कपडे चेंज करके शादी मैं नीचे आया लेकिन कंही ना कंही वो परेशान था और ठाकुर जी से बोलने लगा मन ही मन मैं “हे ठाकुर जी क्या हो रहा है ये सब”

    तभी उसके यार दोस्त उसको बुलाने लगे वो भी शादी की मस्ती मैं खोने लगा उधर समय भी आगे बढ़ता गया , फेरो का टाइम हो चूका था सब यार दोस्त जाने लगे "सभ्य " तो बस सोफे पर बैठे बैठे ख्याली पुलाव बना रहा था , तभी अचनाक किसी ने उसको आवाज दी !

    अरे आप क्या आप मेरी भतीजे को संभालोगे मैं २ मिनट मैं आई, इस से पहले "सभ्य " कुछ सोचता उसने उस लड़की को देखा और फिर से हड़बड़या और बोला जाआआ... जरूर , अब थोड़ा "सभ्य " के चेहरे पर मुस्कान आई और छोटे बच्चे के साथ वो खेलने लगा समय काफी बीत गया ,अभी बच्चा भी परेशान होने लगा उधर "सभ्य " देखता है की वो लड़की आ रही है आते ही बच्चा फटाफट लड़की के पास आपने नन्हे नन्हे पैरो से टेड़ा मेढ़ा होकर भगा और झट से उससे लिपट गया , लड़की ने "सभ्य " को देखा और आँखों से थैंक यू का इशारा करते हुए दुल्हन के पीछे जाकर बैठ गयी बाकि लोगो के साथ ,

    "सभ्य " इससे पहले कुछ पूछने की हिम्मत करता इतने मैं यह सब हो गया ,

    "सभ्य " सोचता रहा की कैसे बात करूँ क्या बात करूँ ?

    उधर रात बीत रही थी इधर "सभ्य " की साँसे थम रही थी क्यूंकि ऐसा एहसास उसको कभी नहीं हुआ था ...

    हरीश वर्मा ..
    ©harish_verma