• santoshmaddhesia34 5w

    #मान की बात

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    खुदा

    कभी बहुत कुछ दे कर रहीस बना दिया
    कभी सब कुछ लेकर फकीर बना दिया
    आजमाते हो दोनों तरफ से
    कभी देकर तो कभी लेकर
    उलटफेर करना ही तो तुम्हारा काम है
    इधर का उधर, उधर का इधर
    खुब चलता है सिक्का तेरा दोनो तरफ
    बराबर तो कभी किया नही
    छोटे और बडे़ सभी यहाँ तेरी रहमत पर
    रहम पर अपनी एक एक किरदार खडा़ किया
    नाव में बैठने वाला भी है,पार उतरने वाला भी है
    सबकी नैया को पार तुमने लगा दिया
    मन बचन और कर्म से जो सच्चा है
    उसे कहाँ से कहाँ पहुचा दिया
    डुबते वही है जिनकी नियत मे खोट होती है
    तुमने तो अंधे लगडे़ बहरे गुंगे को भी पार लगा दिया
    काम है तुम्हारा पार लगाने का नाम
    जिसने जैसा चाहा वैसा ही पाया
    भेदभाव ही नही कोई,
    रात और दिन का एहसास एक जैसा
    सूरज का प्रकाश एक जैसा
    पवन के झकोरे मंद मंद चहू ओर चले
    बारिश की रिमझीम सबपर समान रुप से पडे़
    जिसने जैसा किया कर्म का फल है दिया
    कभी बहुत कुछ देकर रहिस बना दिया
    कभी सब कुछ लेकर फकिर बना दिया
    फर्स से लेकर अर्श सारा उलट फेर तेरा ही तो है
    धनिराम नाम से धनि उसे भी निर्धन बना दिया
    दुःखीओ के दुःख दुर करने वाले मेरे राम
    दुःखीराम के जीवन को अन्नत प्रकाश से रोशन कर दिया
    अपने ही कर्मो का फल है जीवन
    जो जैसी करता है देर से ही सही वही भरता है
    तुमने तो केवल सबके कर्मो का फल है दिया
    कभी सपनो से भी उच्चा कभी हकिकत से भी निचा
    देना बहुत कुछ और लेना सबकुछ
    कभी सब कुछ लेकर फकिर बना दिया
    कभी बहुत कुछ देकर रहिस बना दिया ।।
    ©santoshmaddhesia34