• _rahulgupta__ 19w

    नमस्ते

    नमस्ते मम्मी!
    इन दो शब्दों से,
    दिन की शुरुआत करता हूँ;
    मैं ज़मीन पर रहकर,
    आसमान की बात करता हूँ।।

    ज़हर को पीकर,
    अमृत की फुहार करता हूँ;
    मैं दिमाग पर नहीं,
    दिलों पर अधिकार करता हूँ।।

    अतिथि है मौत,
    इस बात का हर पल ख्याल रखता हूँ;
    जिंदा हूँ सिर्फ इसलिये,
    कोशिशें हज़ार करता हूँ।।

    जय हिन्द

    ©_rahulgupta__