• hritikraj 30w

    इश्क

    इश्क की क्या मैं तारीफ़ करूँ,
    सरे आम ना ये मैं जाहिर करूँ,
    रूह की रूह से मुलाक़ात होती है ये,
    तो कैसे मैं इससे इन्कार करूँ...

    कुछ लम्हों की दास्ताँ लिखूँ,
    या जिन्दगी इसे मैं ऐसे ही जीयू,
    जब इश्क हो गया है किसी से,
    तो कैसे मैं उससे इकरार करूँ...

    आँखों की आँखों से तालाश करूँ,
    या बन्द होठों से जाहिर मैं अपने जज़्बात करूँ,
    जब इश्क हो गया है किसी से,
    तो कैसे मैं इन्तज़ार करूँ...

    दिल पे उसका नाम लिखूँ,
    या धड़कन से उसकी पहचान करूँ,
    जब इश्क हो गया है किसी से,
    तो कैसे मैं उससे बेइन्तहा प्यार करूँ........


    ©hritikraj