• arzoorathore 23w

    जो लतीफा बना वो तमाशा सरेआम ना होता,
    वो बेवफ़ा ना होता तो इश्क़ मेरा बदनाम ना होता,
    बहुत जतन करे मैंने इस चाहत को पूरा करने के,
    उस हरजाई ने भी जैसे ठाना था इसे अधूरा रखने को,
    ढाई अक्षर का प्रेम शब्द ही जब सदा अधूरा है,
    तो गलत ही सोचा मैंने की मोहब्बत का वो साथी पूरा हे,
    दिल्लगी कि हसरत मेरे दिल की लगी बन गई,
    ये कम्बख्त मोहब्बत मेरी बंदगी बन गई..

    ©नेहा विक्रांत यादव