• dhruwsingh 5w

    गजल -12/8/2019
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    अमावस रात मे तारो को देखकर सपने गिनता हूँ !
    उजाला होने तक खुद का हौंसला तैयार करता हूँ !!

    जीवन तो बहती ऩही है लौट कर कोई आता नही !
    जो ख्बाव सजाने है उन्हे दिलो मे लेकर चलता हूँ !!

    यह यकीन मानो राहो मे कितनी मुसीबते आने लगे !
    उनका सामना कर मैं वक्त का दरिया पार करता हूँ!!

    कामयाबी पाते ही उसके सारे कष्ट कोई देखता नही !
    हाथ मिलाने की होड मे न जाने क्यों छोटा समझता हूँ !!

    हर मॆजिल पर चलने की आह मेरा एक पडाव है !
    गजल लिखकर लोगो के सामने खऱी खऱी बात रखता हूँ !!
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    स्वरचित ध्रुव प्रकाश सिंह क्रांचिकारी पत्रकार व कवि2/159 विश्वास खंड गोमती नगर लखऩऊ ऊतर प्रदेष भारत !
    ©dhruwsingh