• rangkarmi_anuj 5w

    धूमिल धूमिल है आसमां
    काले सफेद रंग में घुला ,
    बीच में बिंदी है
    छोटे गोल चांद की
    जुगनू के जैसे वो
    धीमे चमक रहा है।

    उसके बगल में एक तारा
    दिख ऐसे रहा है,
    जैसे छोटा काला टीका
    जब माँ कभी हमें
    बचपन में लगाती थी
    नज़र न लग सके।

    घुप अंधेरे में रौशनी
    चांद और तारे की,
    कह सकते हैं उन्हें
    आसमानी लालटेन बिना तेल वाले
    और सब मुफ्त में
    रौशनी का मज़ा ले रहे हैं।

    खुशी ज़ाहिर कर रहे हैं
    वो टूटे फूटे हुए खंडहर
    उन्हें अकेले में डर नहीं लगता होगा,
    अंधेरे से क्योंकि
    वो झींगुर की आवाज़ सुनकर
    रात काट लेते हैं।

    ऊपर से आती रौशनी
    बहुत कुछ बयां कराती है,
    दिल की बात भी
    और किसी के जज़्बात भी
    उस रौशनी में कोई
    मोहब्बत के खत भी लिखता होगा।

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    धूमिल

    ©rangkarmi_anuj