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    कलाकार एक, उसकी कलाएँ अनेक

    -Shubham Joshi
    ©ubhayhastkushal
    15/08/2020

    हर रात, उस एक पलंग पर पड़े पड़े
    मन में विचार आते थे बड़े बड़े

    चंचल मन कहाँ से कहाँ छलांगें लगाता था
    होकर मुक्त, हर बंधन से, कोना कोना घूम आता था

    किसी काल्पनिक संसार का
    समस्त वास्तविक ब्रह्मांड का

    इसका कारण कदाचित मेरा एकाकी जीवन था
    या मन में कुछ कर दिखाने का पागलपन था

    स्वर्णिम भविष्य की ओर जाने वाले सारे मार्ग अवरुध्द थे
    मानो सारे ग्रह नक्षत्र तारे मुझे पर क्रुद्ध थे

    जो करना चाहता था, नहीं मिल रहा था वो करने
    कदाचित इसी कारणवश मैं कुछ और ही लगा करने

    जिस औद्योगिक मार्ग को अपना उद्देश्य बनाया था
    उस पर अग्रसर होने का कदाचित अभी समय नहीं आया था

    निराशावश मैं कला के मार्ग पर हो गया प्रशस्त
    अपने दुःख को कविताओं का रूप दे कर स्वयं को रखने लगा व्यस्त

    कालांतर में बढ़ता ही गया वो दुःख
    और कला के प्रति समर्पित होकर मिलने लगा मुझे सुख

    धीरे-धीरे कवितायें लिखना मेरी दैनिक गतिविधियों में आ गया
    और विभिन्न कलाएँ विकसित करने का विचार मेरे मस्तिष्क पर छा गया

    दफ्तर से आ कर मुझसे कभी खाली बैठा न गया
    प्रतिदिन रात भर बैठ कर करने लगा कुछ न कुछ नया

    इस प्रकार शुरुआत में मैं था सिर्फ एक कवि
    लेकिन बाद में बदलती ही गयी मेरी छवि

    कभी संस्कृतज्ञ, कभी कवि,
    कभी उभयहस्तकुशल, कभी योगी
    कभी गायक, कभी चित्रकार,
    कभी बुद्धि के खेल करने वाला कलाकार
    देह से दुर्बल किन्तु मन से बलवान
    करके अत्यंत कठिन व्यायाम कहलाने लगा पहलवान

    सोशल मीडिया पर अजनबी हमेशा करते थे प्रोत्साहित
    लेकिन परिचित ही उड़ाकर मेरी कलाओं का मज़ाक, करते थे हतोत्साहित

    लेकिन अगर उनकी बात सुनकर मैं तब रुक जाता
    तो यह उभयहस्तकुशल आज इस प्रकार बहु प्रतिभावान न बन पाता

    सिर्फ नाना कलावंत होने का नहीं है प्रश्‍न
    मेरे बढ़े हुए आत्मबल और आत्मविश्वास का मनाता हूँ जश्न

    बहुत कुछ मिला मुझे इस लम्बी यात्रा में
    अनुभव, ज्ञान और सम्मान मिला बहुत मात्रा में

    अभी तक अनेक कलाओं में पारंगत हो गया
    फिर भी सीखने को, करने को, ढूंढ रहा हूँ कुछ नया

    जितना सीखता हूँ, उतना ही बढ़ता है मेरा आत्मविश्वास
    और ज्यादा सीखने की, बढ़ती जाती है, खुद से आस

    इसीलिए कला के क्षेत्र में सदैव रहूँगा अग्रसर
    विकसित करता रहूंगा अपनी कलाओं को निरंतर

    -Shubham Joshi
    ©ubhayhastkushal
    15/08/2020