• k_rohit 23w

    लहरें उठती है तो उठ जाने दो
    कश्ती मेरी कमजोर थोड़े न है।

    दाम लगाते है तो लगा लेने दो
    शख्सियत मेरी नीलाम थोड़े न है

    शौख है खेलने का तो खेल लेने दो
    हम भी कोई अनाड़ी थोड़े न है।

    चेहरे का लिबास नहीं दिखता तो मत दिखने दो
    आईना अभी धुंधला है टुटा थोड़े न है।

    इल्ज़ाम लगाते है तो लगा लेने दो
    हम भी इंसान है ख़ुदा थोड़े न है।
    ©k_rohit