• rjmanjeri 52w

    कैसे सपने सजे

    कैसे सपने सजे ,पलकों के तले।
    के आंखों में, आसुंओं की बूंदे आ गई।
    कैसे सपने सजे...
    छलक वो गए , मेरे गालों पर।
    मेरे ख़्वाबों में, ज़रा सी नमी आ गई।
    कैसे सपने सजे...
    मेरी ख़ामोशियों में , तन्हाइयों की।
    ना जाने कब वो जुबां बन गए।
    कैसे अपने सजे...।

    © RJ Manjeri
    27.11.19