• ehsaas_arav 34w

    आज दिल के कमरे से,
    यादों का इक खत निकला,
    खोलते ही उसमें से,
    मेरे पिता का वक्त निकला,

    बड़े प्यार से समझाते थे,
    दुनिया कठोर है,
    जरा तुम भी फौलाद बनना,
    मैं मन में कहता था,
    हर जन्म में आप ही मेरे
    पिता बनना,

    निस्वार्थ भावना से अपनी,
    मुझे जीवन बता रहे थे,
    भरोसा करना संभल के,
    है अग्निपथ ये बता रहे थे,

    उनसे सीखना था बहुत,
    छांव में उनकी भीगना था बहुत,
    पर बड़ा बेरहम ये वक्त निकला,
    और मेरे हाथ से मेरे पिता का हाथ फिसला,

    आज दिल के कमरे से,
    यादों का इक खत निकला,
    खोलते ही उसमें से,
    मेरे पिता का वक्त निकला।

    ������
    miss you papa

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    आज दिल के कमरे से,
    यादों का इक खत निकला,
    खोलते ही उसमें से,
    मेरे पिता का वक्त निकला।

    (read the caption)


    ©ehsaas_arav