• loveneetm 5w

    अटल सत्य

    मृत्यु लिखा विधाता ने,
    सबका तय हैं स्थान,
    जिसकी जैसी गति लिखी,
    वैसे निकले प्राण।

    एक दिन एक साधु राह में,
    कहे किसी को बात,
    हे! राही तेरी मृत्यु लिखी,
    इसी जगह मध्य रात।

    राही क्रोधित हो कहे,
    नाकर मिथ्या अनुमान,
    तू कहता है दो दिन में,
    निकले मेरे प्राण।

    मैं इस पथ से भागकर,
    जाऊँ इतना दूर,
    ना लौटूँ फिर पुनः यहाँ,
    मृत्यु हो मजबूर।

    भाग भागकर थक गया,
    किया शयन आराम,
    भूल बैठा फिर उठकर,
    किस दिशा करूँ प्रस्थान।

    भाग भागकर पुनः वो,
    आया उस स्थान,
    देख चकित हैरान था,
    मृत्यु खड़ी पाषाण।

    इस कारण विधाता की,
    बात अटल विधान,
    मृत्यु तय हर मानव की,
    सत्य समझ इंसान।
    @लवनीत