• dhruwsingh 10w

    गजल -10/8/2019
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    रास्ते भऱ चलते रहे उऩकी मुलाकातो पे!
    जिन्दगी गुजर रही है उनकी खामोश बातो पे !!

    कहते है वो बहुत उलझी पहेलिय़ाँ है !
    कैसे दिन रात बीते यारो के दिये आघातो पे !!

    चाहे आसमान जमीन पर आ जाये !
    अब वो कशिश तडपाये अपने प्रेमी नातो पे !!

    ईश्क तो ताश के खेल की तरह !
    सब कुछ खत्म हो जाता ट्रम्प कार्डो पे !!

    सडको पर आवारा घूमकर गाते रहे !
    आँसूओं से भीगे नयन आपकी यादो पे !!
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    स्वरचित मौलिक ध्रुव प्रकाश सिंह " क्रांतिकारी " पत्रकार व कवि 2/159विश्वास खण्ड गोमती नगर लखनऊ उत्तर प्रदेश भारत !मोबाइल -8765346548
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