• abhi1701 24w

    Love

    कुछ गुज़रती राते
    यूँ ही गुज़र जाया करती है
    तेरी मेरी बातों में,
    यूँ गुजारा नही होता तेरी
    पुरानी बातों से,

    ये रात यूँ ही गुज़र जाया करती है,
    तेरी नई बातों के लिए
    काश तू आज भी होती,
    उन बातों के लिए

    हमेशा तेरा इंतेज़ार किया करता था
    अपनी कविता सुनाने के लिए
    तू सुनकर भी अनसुना कर देती थी
    पता नही किस कारण के लिए


    ©Abhiशेक