• msr_prose 14w

    तेरे इश्क़ में...

    तेरी गलियों में घूमता रहता हूं आंखो का पानी बिछाते-बिछाते।
    ज़माना बीत गया और सदी आ गई, तुझे ग़ज़ल में तब्दील कर गाते-गाते।

    तेरी तस्वीरो का वजूद है मेरी ज़िन्दगी से कहीं ज्यादा,
    कभी उनको देख के निकलता है दिन, तो कभी गुजरती हैं राते।

    तुझे याद है जिस तस्वीर में लगती है, तू सबसे ज्यादा ऐठी हुई,
    पूरी रात लग गई मुझे पेच-ओ-ख़म में, कि उस नींद से तुझे उठाते-उठाते।

    अचानक छूट गई मेरे हाथ से और बिखर गई फर्श पर वो हसीं यादें,
    फ़िर तो मेरी पूरी रात गुज़र गई गिरता पानी पोंछते पोंछते, और उन तस्वीरों को सजाते-सजाते।

    मेरी वफ़ा का इतिहास छिपा हुआ है तेरे इन कूंचों में,
    इन्हीं में तबाह जो हुआ था मैं, तेरे इश्क़ में धूम मचाते-मचाते।

    लगा ही लिया मौत ने मुझे एक दिन गले, बर्शर-ए-दरिया।
    निकल ही गई तेरी सादगी को जाया करते करते मेरी सांसे, तेरे कठोरपन को बचाते-बचाते।
    ©msr_prose