• shivam_chourasiya 22w

    जलता चिराग..

    था यादों में संजोया निशां उनका
    था रेतो में भी उभारा निशां उनका
    पर आती हुई वो... लहरे
    यूँ मिटा गएँ .....

    बचा न कुछ भी अब, गर्दिश में
    सितारे तो क्या,
    अंधेरे भी दामन छुङा गएँ ।

    धोखे की तराई पर यू गिरे हम
    कि उठने की कोशिश में तो,
    कब्र के आगोश मे समा गएँ.....

    विहंगों की चहकन में गुंजती अब मेरी कहानी
    खत्म हुई यूँ ऐसे
    खत्म होती है जैसे ,
    एक झोंके से, जलता चिराग.......

    ©shivam_chourasiya