• ashutosh098 23w

    आजकल डर बसा है,
    डर बसा है इस बात का,
    कि एक तरफ हम चाहें सब गलत
    बर्दाश्त ही क्यों न कर ले,
    हमारी फिज़ा बस कहीं खराब न हो जाए!
    दोस्ती चाहे करीब जितनी भी अपनी रहे,
    उस दोस्ती पर प्यार की,
    नज़र न कहीं लग जाए!
    मगर ज़िंदगी का सही किनारा,
    ढूंढना भी हमें ही है,
    क्योंकि दरिया के बीचोंबीच,
    आसरा और फैसला खुद का होता है,
    किसी तीसरे की दुआएँ भी नसीब हो जाए,
    तो बड़ी बात है !!
    -Ashutosh