• shabd_vish 23w

    आज फिर लहज़ा परिवर्तित।नई शुरुआत।।।

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    बड़ी बेबस निर्झर बनी ज़िंदगी
    रुका ठहरा टूटा सपना बनी ज़िंदगी
    तुम बिना खुशहाली का हर पल
    कड़वेपन का एक एहसास बनता गया
    उसी विराट आकाश की विवशताओं से
    मैं तुम्हे निहारता रहा,तुम निकलती रही।
    ©aakash398
    अविश्वासन