• kiro__ 24w

    कुछ ख्वाईशें अधूरी ही क्या ख़ूब लगती हैं
    हक़ीक़ी बस हैरतअंगेज बातों का हिस्सा लगती है
    ऐ जिंदगी तू उसकी यादों की गुलाम लगती है
    गुरेज पर भी हमसफ़र हर दफा हमराज़ लगता है
    शुक्रिया! आलिम की आराइश में महफ़िलें लगती है
    शुक्रिया !आप का अक्स हमारे आँगन से मिटा सा लगता है
    शुक्रिया ! आप की आजमाइशों से हम आज आज़ाद लगते हैं
    शुक्रिया ! अब तो हर प्यार फ़रेबी लगता है
    शुक्रिया !हर जरूरत ग़ैर लगती है
    शुक्रिया! अब न खलिश चुभती है न हसरते अपनी लगती है
    शुक्रिया !अकबर ,तेरे किस्से पुराने मेरे कहानी नई लगती है।
    शुक्रिया !की मन्ज़िल बीत गयी और रास्ते पुराने लगते है।
    शुक्रिया अदा कैसे करे जनाब का अब गैर जो लगते है ।।