• aaditya 9w

    पंद्रह मिनट लक्स से मुंह धुल के, दोस्त से उधार नीला ब्लेजर पहन,और ऊपर से नीचे तक 'एक्स' दियो से नहाने के बाद जब लड़का पहली बार लड़की से मिलने हॉस्टल से निकलता है तो वार्डन से लेके सिक्योरिटी गार्ड तक को अंदाज़ा हो जाता है की आज या तो ये लड़का ख़ुशी में पी कर कमरे पर लौटेगा या फिर ग़म मे।

    लड़की अपना स्टोल उतार स्कूटी से जब उतरती है तो मानो लड़के की दुनिया थम सी जाती है।
    काला सूट और काला बादल असमंजस में डाल देता है की सावन आज आसमान से केहर बरसाएगा या ज़मीन से। मानो विरह के पतझड़ मई के साथ पीछे छूट गए हो और जून के लगते ही सावन की तरह स्कूटी से उतरते हुए उसके साथ चले आए हों।
    काला सूट और काली एक्टिवा। जैसे क़यामत।

    लड़की को देख कभी शर्माता तो कभी मोबाइल के फ्रंट कैमरा से चुपके से अपना चेहरा देखता है तो मानो वेटर को भी चेहरा देख पता चल जाता है की शायद इसका पहला प्यार यही है।

    हिचकिचाहट के साथ जब दस मिनट बहस हो जाती है की आर्डर पहले कौन देगा तो दोनों अचानक से बोलते हैं " चलो, एक साथ आर्डर देते हैं तीन की गिनती पर। "
    "एक, दो और तीन.."लड़की झट से कोल्ड कॉफ़ी विथ बर्गर और लड़का तुरंत हिसाब लगा के अपने लिए सिर्फ बर्गर आर्डर करता है। इश्क़ में हिसाब लगाना भी बेहद ज़रूरी होता है।
    आखिर सबसे महंगा इश्क़ गरीब ही करता है।

    जैसे ही आर्डर आता है पहले आप - पहले आप की बहस फिर शुरू हो जाती है। आखिरकार हार मान के लड़का पहला बाइट लेता है और बर्गर से ज़्यादा बड़ा मुंह खोलने के वजह से लड़की देख हंसती है। उसको हँसता देख लड़का बोलता है "हँस लिया है तो तुम भी खाओ, वर्ना मुझे पूरा खाने में कोई परहेज नहीं है।"
    "अच्छा जी , इतने खब्बू हैं आप" कहके लड़की हंसती है और आजु बाजू देख आर्डर अपनी तरफ खिसका के खाना शुरू करती है।
    जैसे ही लड़की कॉफ़ी का पहला सिप लेती है वो लड़के से नज़र छुपा के दूसरा स्ट्रॉ मंगाती है। स्ट्रॉ आने पर हैरान होके लड़का लड़की को देखता है और लड़की बोलती है " अकेले अच्छा नहीं लगता, तुम भी पियो ना।"
    छोटे शहरों के प्यार में आप से तुम का सफर तय होने की दूरी महज़ एक स्ट्रॉ भर की होती है।

    कॉफ़ी पीते-पीते जब दोनों की नाक लड़ती है तो लड़की टक-टक करके देखने लगती है। अचानक से लड़का पूछता है "शादी करोगी?"
    लड़की थोड़ी देर एक टक देखती है फिर कहती है "यही बताना था मुझे, चैट में कहना अजीब लग रहा था। माँ-बाउजी ने एक लड़का देखा है। सरकारी नौकरी भी है। उम्र में थोड़ा बड़ा है पर लगता नहीं।"
    लड़का कुछ नहीं बोलता है। अपने गुस्से और आंसू को छुपाने की पुर-जोर कोशिश करता है। अचानक से उसको रांझणा फिल्म का डायलॉग याद आता है। "मोहल्ले के लड़को का प्यार अक्सर डॉक्टर इंजीनियर ले जाते हैं।"
    लड़के के जुबां पर आया "आई लव यू" वहीँ से वापस लौट जाता है। कोल्ड कॉफ़ी आधी छोड़ लड़का बोलता है" मैं निकलता हूँ अब। वापसी में बस नहीं मिलेगी वर्ना। "

    लड़का मन ही मन सोचता है " प्यार तो करते है। शादी नहीं हुई तो काहे का प्यार।"
    लड़की के पीछे स्कूटी पर बैठ लड़का बस स्टैंड की तरफ निकलता है। उसके परफ्यूम की खुशबू उसके दुप्पटे से उड़ते हुए उसके साँसों पर जाके ठहरती है। उसकी काजल वाली आँखें साइड मिरर से देख खंजर की तरह उसके दिल पर वार करती है।
    ब्रेक लगने पर लड़का ज़रा आगे की तरफ खिसकता है, और अपने होंठ उसके सूट से छूटी नंगी पीठ की तरफ पा के हलके से चूमता है। तभी लड़की झट से बोलती है " दिमाग ख़राब है क्या? तुम यहाँ सिर्फ पढ़ने आए हो। पर शहर तो मेरा है।" लड़का बैग टाँग शर्मिंदा होके मन में बोलता है " साला किस बात का प्यार, जब चूमने पर पागल कहे।"

    लड़का जैसे ही अपना गुस्सा छुपा बस की तरफ कदम बढ़ाता है तभी लड़की बोलती है " सुनिए!" , " हाँ, अब क्या?" लड़का गुस्से में जवाब देता है।
    " मुझे भी तुमसे बहुत प्यार है। शायद माँ-बाउजी को भी पहली नज़र में पसंद आ जाओ। हम परेशां कर रहे थे। कोई लड़का नहीं है । "
    सुनते ही मानो गर्मी के मौसम में लड़के के अगल-बगल ठंडी हवाएं चलने लगती हैं। जहाँ किसी को गिटार क्या होता है नहीं पता वहां रोमांटिक गीतों की टोन अपने आप बजने लग जाती है।सारी झुंझलाहट मानो उसकी आवाज़ के साथ चली गयी हो।
    "जाओ अब वर्ना बस चल देगी", लड़का बस के आखरी पायदान से उतर के तुरंत ख़ुशी के मारे उसकी स्कूटी की तरफ भागता है। मानो बस तो फिर आ जाएगी प्यार थोड़ी ना।
    लड़का गाल पर हिचकिचाते हुए हल्का सा होंठ छुआता है और धीरे से कान में बोलता है" बहुत प्यार है हमें आपसे। ऐसे ना परेशां किया करो। आई लव यू "
    इतने में बस स्टार्ट हो जाती है और लड़का भागता है, मानो उसके आई लव यू का जवाब चूमने के स्वीकृति में था।
    लड़की ज़ोर से शोर के बीच में बोलती है "सुनिए ! आई लव यू टू" मानो बचपन से अपना शहर अब पराया हो गया हो।

    लड़का अब पढाई में दुगुनी मेहनत करता है। साथ में सरकारी नौकरी की तैयारी भी जो करनी है। नए कपडे लेने कम कर दिए हैं, बदले में किताबें लेता है। लड़की भी बेवजह अब बिंदी लगाने लगी है। मुस्कुराती है तो गड्ढे गालों में अब और गहरे पड़ते हैं।

    साल बीत गए दोनों को अलग हुए पर उनका प्यार अब भी वहीँ कहीं ठहरता है। उसी रेस्ट्रॉन्ट, उसी बस स्टैंड,उसी शहर मे। अकेले नहीं।

    ऐसे ही अनगिनत अधूरी कहानियों के साथ।

    ©आदित्य