• svaaaaa 23w

    कोई वैसा होगा जैसा मैंने चाहा था न खासी रंग रूप की मै न रंग रूप की चाह थी
    वो डाल डाल का पंछी न हो एक से इश्क़ निभाना जानता हो
    वो एक सुकून का सागर हो जिसका किनारा में हु ऐसा मेने सोच था
    अब ना आयेगे ऐसे बेहूदा खया।ल।
    अब जो मैने ,
    दिल लगाए बैठे लोगों का अन्जाम देख लिया मेने प्यार में पड़े लोगो का पागलपन जो अब देख लिया, क्या सुध बुध खोके बैठे प्यार में पड़ने वाले प्यार को सरआंखों पर बैठा कर अपनो को दिल से उतार देने वाले देख लिए है ,
    प्यार में धोखा खाया उनने दर्द मुझे होता प्यार के नाम पे कोई इतना बेगैरत कैसे होता है, प्यार की वो लाचारी मुझ को जायज नही लगती।