• vickastomar 33w

    जल,पानी जो कहना चाहे कहिए क्यूंकि बात नाम की नहीं आज की है और आने वाले कल की और आप सब भी जानते तो हैं ही ना बस कमी इतनी सी है मानना नहीं चाहते,कदम उठाना नहीं चाहते,खुद में सुधार लाना नहीं चाहते और ये बहुत निराशाजनक है।।
    उम्मीद है कि अगर कुछ नहीं तो कल से कल से क्या अभी से ध्यान देकर जितना हो सके उतना पानी बचाएं।।ये मेरा आप सब से हाथ जोड़कर ������������ अनुरोध है।।

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    जल/पानी

    मोल जल का जो समझे नहीं तो ये चमकते प्याले खाली हो जाएंगे,
    बहते हैं कल कल कर जो दरिया वो दरिया भी प्यासे हो जाएंगे,
    अनंतकाल से बसता है महाकाल की जटाओं में कभी साधारण कभी सात्विक सा ये पावन जल,
    अस्तित्व खत्म हुआ जो 'फ़िदातो' तो जीव जल के बिन ही जल जाएंगे।।

    बूंद बूंद से भरे थे जो सागर वो सब भाप बनकर उड़ जाएंगे,
    जिसको थामे खड़े हैं ये बाँध, वो बाँध मिट्टी में मिल जाएंगे,
    पावन सरल पवित्र गंगा मइया की पहचान है कभी बहता कभी उतरता सा ये पावन जल,
    अस्तित्व खत्म हुआ जो 'फ़िदातो' तो लाशें चील कौए ही खाएँगे।।

    मेरा Submersible मेरा पंप,हम तो सड़कों पर फैलाएंगे,
    किसी के बाप की जागीर नहीं ,जो हुई कभी इच्छा तो थोड़ा बहुत बचाएंगे,
    हर जीव की रग रग में बहता है कभी उफनता कभी शांत सा ये पावन जल,
    अस्तित्व खत्म हुआ जो 'फ़िदातो' तो मिलकर हम इन शहरों इन गांवों में रेगिस्तान बनाएंगे।।

    मैं क्यूँ करूँ पहले वो करे,ये बहाने आखिर कब तक काम आएंगे,
    अवगत हो समय का चक्का रुकता नहीं,इक रोज सब कहीं मुंह छिपाएंगे,
    चावल गेहूं मक्का ज्वार हर बीज हर दाने में बसता है कभी खौलता कभी शीतल सा ये पावन जल,
    अस्तित्व खत्म हुआ जो 'फ़िदातो' तो ये फिसलते दिन वापस न आएंगे।।ये फिसलते दिन कभी वापस न आएंगे।।

    ©vickastomar (फ़िदातो)