• ajayamitabh7 23w

    मिली जुली सरकार की तरह
    अजय अमिताभ सुमन

    फंसी जीवन की नैया मेरी , बीच मझधार की तरह ।
    तू दे दे सहारा मुझको , बन पतवार की तरह ।

    तेरी पलकों की मैंने जो , छांव पायी है ।
    मेरी सुखी सी बगिया में, हरियाली छाई है ।
    तेरा ये हंसना है या की , रुनझुन रुनझुन ।
    खनखनाना कोई , वोटों की झंकार की तरह ।

    तेरे आगोश में ही , रहने की चाहत है ।
    तेरे मेघ से बालों ने, किया मुझे आहत है ।
    मेजोरिटी कौम की हो तुम , तो इसमे मेरा क्या दोष।
    ये इश्क नही मेरा , पॉलिटिकल हथियार की तरह ।

    हर पॉँच साल पे नही , हर रोज वापस आऊंगा ।
    तेरी नजरों के सामने हीं, ये जीवन बिताउंगा ।
    अगर कहता हूँ कुछ तो , निभाउंगा सच में हीं ।
    समझो न मेरा वादा , चुनावी प्रचार की तरह ।

    जबसे तेरे हुस्न की , एक झलक पाई है ।
    नही और हासिल करने की , ख्वाहिश बाकी है ।
    अब बस भी करो ये रखना दुरी मुझसे ।
    जैसे जनता से जनता की सरकार की तरह ।

    प्रिये कह के तो देख , कुछ भी कर जाउंगा ।
    ओमपुरी सड़क को , हेमा माफिक बनवाऊंगा ।
    अब छोड़ भी दो यूँ , चलाना अपनी जुबां ।
    विपक्षी नेता का संसद में तलवार की तरह ।

    चेंज की है पार्टी तो, तुझको क्यों रंज है ।
    पोलिटीकल गलियों के, होते रास्ते तंग है ।
    चेंज की है पार्टी , पर तुझको न बदलूँगा।
    छोडो भी शक करना , किसी पत्रकार की तरह ।

    बड़ी मुश्किल से गढा ये बंधन , इसे बनाये रखना ।
    पॉलिटिकल अपोनेनटो से , इसे बचाये रखना ।
    बस फेविकोल से गोंद की , तलाश है ऐ भगवन।
    की टूटे न रिश्ता अपना , मिली जुली सरकार की तरह ।

    फसी जीवन की नैया मेरी , बीच मझधार की तरह ।
    तू दे दे सहारा मुझको , बन पतवार की तरह ।


    अजय अमिताभ सुमन
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