• _indian_ink_ 35w

    हवा का रूख मुड़ेगा ,
    जब मेरा प्रेम पत्र खुलेगा |

    तेरी यादें दफ़्न है उसमें ,
    धूल का हर इक कण तब अंगार सा उड़ेगा |

    कटघरे में नाम है काफी ,
    हर इक पन्ना तेरे वादों का फिर तराजू में तुलेगा |

    भीगी हुई है मेरी हर क़लम तेरी ही रूह से , 
    मेरे हर जख़्म पर कलंक तुम्हारा मिलेगा |

    फुर्सत मिले तो आ जाना उस दिन ,
    मेरी रूह पर कब्ज़ा सिर्फ तुम्हारा ही मिलेगा |

    ©_indian_ink_