• bhargava_prem 23w

    तेरी नजरों से

    तेरी अंजुमन में यूँ, हो गुमनाम पीता हूं
    कभी-कभी तेरी नजरों से, मैं तो जाम पीता हूँ।

    पीता हूँ, मैं तो सरेआम; हर शाम पीता हूँ
    जिदंगी के जशन में, मैं जहर तमाम पीता हूँ।

    कभी-कभी तेरी नजरों से ...।।




    ©bhargava_prem