• neha__choudhary 10w

    20-09-2020

    1. अपवित्रता आत्मघात है। पवित्रता जीयदान है। 
    2. यह संगमयुग होली जीवन का युग है। तो रंग में रंग गये अर्थात् अविनाशी रंग लग गया। जो मिटाने की आवश्यकता नहीं।
    3. बाप, समान बनाने की होली खेलने आते हैं। कितने भिन्न-भिन्न रंग बाप द्वारा हर आत्मा पर अविनाशी चढ़ जाते हैं। 
    4. वह होली मनाते हैं, जैसे गुण हैं वैसा रूप बन जाते हैं। उसी समय कोई उन्हों का फोटो निकाले तो कैसा लगेगा। वह होली मनाकर क्या बन जाते और आप होली मनाते हो तो फरिश्ता सो देवता बन जाते हो।
    5. होली की विशेषता है जलाना, फिर मनाना और फिर मंगल मिलन करना। 
    6. प्रजा के प्रति महादानी व अन्त में भक्त आत्माओं के प्रति महादानी बनो। आपस में एक दूसरे के प्रति ब्राह्मण महादानी नहीं। वह तो आपस में सहयोगी साथी हो। 
    7. जो ज्यादा मूँझते हैं- क्या हुआ, क्यों हुआ, कैसे हुआ वह मौज में नहीं रह सकते। आप त्रिकालदर्शी बन गये तो फिर क्या, क्यों, कैसे यह संकल्प उठ ही नहीं सकते क्योंकि तीनों कालों को जानते हो।
    8. होली का अर्थ भी है होली, पास्ट इज़ पास्ट। ऐसे बिन्दी लगाने आती है ना! यह भी होली का अर्थ है। 
    9. महादानी अर्थात् मिले हुए खज़ाने बिना स्वार्थ के सर्व आत्माओं प्रति देने वाले - नि:स्वार्थी। 
    10. स्व के स्वार्थ से परे आत्मा ही महादानी बन सकती है। दूसरों की खुशी में स्वयं खुशी का अनुभव करना भी महादानी बनना है।
    11. जिसको खुशी देंगे वह बार-बार आपको धन्यवाद देगा। दु:खी आत्माओं को खुशी का दान दे दिया तो आपके गुण गायेंगे। 
    12. मास्टर दाता बन परिस्थितियों को परिवर्तन करने का, कमजोर को शक्तिशाली बनाने का, वायुमण्डल वा वृत्ति को अपनी शक्तियों द्वारा परिवर्तन करने का, सदा स्वयं को कल्याण अर्थ जिम्मेवार आत्मा समझ हर बात में सहयोग वा शक्ति के महादान वा वरदान देने का संकल्प करो।