• ramaiyya 23w

    ख्वाब और भाग्य

    ख्वाब बस कल्पना मात्र हैं,
    आकांशाओं की पहुँच से,
    चाहतें मंजिलें पा सकतीं हैं,
    मेहनत के पंजों की खंरोच से।

    ख्वाब और ख्वाहिश में हमें,
    थोड़ा फर्क रखना चाहिए,
    ख्वाबों को पहले हमें,
    चाहत में तब्दील करना चाहिए।

    ख्वाब अधूरे रह जाते हैं,
    ख्वाहिशें पूरी होती हैं,
    ख्वाब पूरे तब नहीं होते,
    जब मुराद अंधेरे में सोती है।

    जब जब सपना टूटता है,
    दोष भाग्य को जाता है,
    जब ख्वाहिशें पूरी होती हैं,
    श्रेय हौसलों को जाता है।

    चाहत पूरी ना होने के लिए,
    भाग्य को दोष देना,
    बहानेबाजी कहा जा सकता है,
    सपनों के सपनों में रहना,
    उनको पा जाने की उम्मीद को,
    नेत्रहीन निशानेबाजी कहा जा सकता है।

    ख्वाबों और अभिलाषाओं को,
    भाग्य से भी जोड़ते हैं,
    उनके टूटने की प्रक्रियाओं के भ्रम की,
    झूठी धारणाओं को तोड़ते हैं।

    संयोग को अगर आप भाग्य कहते हैं,
    तो मैं भाग्य पर विश्वास करता हूँ,
    बुरे संयोगों के आगमन से,
    बुरी तरह से डरता हूँ।

    लकीरों और भाग्य को लेकर,
    विचारों में मतभेद हो सकते हैं,
    दुख को भाग्य से जोड़ने वालों के लिए,
    ये विचार संवेदनशील हो सकते हैं।


    ©ramaiyya