• viveksengar 9w

    सबक ज़िन्दगी के

    ऐ ज़िन्दगी ! मै तेरे सारे सबक सीख गया
    अब ज़िन्दगी भर न इनको भूलूंगा ।

    जो छूट मुझसे मेरी परछाईं भी
    मै ना बदला था, ना बदलूंगा ।

    चांदनी रात की वो मीठी नींद रख ले तू
    खुले आंखो के ख्वाब मै रख लूंगा ।

    जुबां के सारे झूट रख के तू
    आंखो से छलकती सच्चाई मै रख लूंगा ।

    मंजिल का अकेलापन रख ले तू
    इन रास्तों से अपना इश्क़ मै रख लूंगा ।

    ये समझदारी के शहर हो मुबारक तुझे
    मै नादानी की बस्ती में रह लूंगा ।

    बेमतलब की बातों में रहे उलझा तू
    अपने लबों की खामोशी मैं चुन लूंगा ।

    पन्नों पे लिखे किस्सों को पढ़के रोएगा तू
    जब सच्ची यारी,टूटा दिल, मुकम्मल इश्क़ के किस्से मै लिख दूंगा ।

    ©vivek_mesmerisingdreams