• sumerjain 23w

    कुछ दिन पहले तक सब थे साथ मेरे पर फिर भी में अकेला था
    शायद सपनो का बोझ मेरे दिल मे आने के लिए दिमाग से लड़ रहा था,
    सोचा मेने कुछ पल रुक जाता हूं,
    सोचा मेने बस अब में हार मान जाता हूं,
    लेकिन न जाने किस ताक़त ने मुझे रुकने से रोक दिया,
    मंज़िल के आने तक मेरा साथ दे दिया,
    आज में अकेला हु,लेकिन न जाने कोई साथ है,
    जिसने मुझे मेरी मंज़िल तक पहुँचा दिया
    ©sumerjain