• sip_of_roohaniyat 20w

    {Just tried my hand at Hindi after a long interval. Hope it makes sense.
    Do give your valuable views dear readers ������}

    लोगों से कम, किताबों से ज़्यादा बतियाती हूँ
    थोड़ी नादान हूँ, औरों के बदले खुद को ज़ख्मी कर बैठती हूँ
    चंद शब्दों में समस्त कहानियां कह जाती हूँ
    मैं खुद को शायर मानती हूँ।

    कहते हैं लोग, खोई खोई सी रहती हूँ
    चलते चलते रुक जाती हूं
    रातों में यूँ ही जग जाती हूँ
    क्या बताऊँ उन्हें, उनसे ज़्यादा अपने कलम की पुकार सुनती हूँ
    मैं खुद को शायर कहती हूँ।

    मैं तो बस एक मेहबूब की मुस्कराहटों को पन्नों पर उकेरती हूँ
    ना जाने क्यूँ सब मेरी कला को शायरी कह देते हैं
    और इसी जुस्तजू में,
    मैं खुद को शायर कह बैठती हूँ।।

    #bs_pc2 @samyak_b @iammusaafiir @hindiwriters @b_prasanaa @when_eyes_narrate @writersnetwork @readwriteunite @mirakeeworld @mirakee @alluring_tulip

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    Mai khud ko shaayar kehti hu

    कभी सूरज की किरणों में रेशम बुन लेती हूँ
    तो कभी टूटते तारों में से लफ़्ज़ चुन लेती हूँ
    दिल को कागज़, बरखा की बूंदों को स्याही बना लेती हूँ
    मैं खुद को शायर कहती हूँ।।

    (Rest in caption)

    ©sipofroohaniyat