• nehulatagarg 24w

    करेंगे क्योंकि हमारी भी ख्वाहिश है की , हम ऐसे ही किसी वाकियें को देखें और इसलिए अब तो यह होकर ही रहेगा और इससे तो अब कोई नहीं रोक सकता हमें । औनियोन वर्तमान में लौट आते है और एफेसियस से कहने लगते है - अब भी पता नहीं कौनसी नयी तरकीब इनके दिमाग़ में चल रही होगी लेकिन जो भी हो हमारी दुआ तो यही है की , यह वहम कभी ना टूटे शहजादें का क्योंकि इनसे बेहतर हमसफर और कोई नहीं हो सकती शहजादें क्रैथेसियन के लिये और बेहतरीन मलिका भी शाह - ए - रोम के लिये तो एफेसियस दुआ में कहते है , आमीन ! लेकिन क्या ऐसा हो पायेगा ? हम सब भी अब तो इन्हें इतना तो जान ही गये है की , यह जो भी फैसला करती है उसे कभी नहीं बदलती । अब आप ही देखिए ना , इनका मुकद्दर सिन्धवीं (भारत ) से जुडा है मगर फिर भी यह उस सच्चाई से इतराज रखती है और वो भी तब जब हम सब जानते है की , वो कितने बेमिशाल है और पूरी दुनिया में उनके नाम से ही सांसे रूक जाती है ब्राथेसियन जैसे शाहों की । तुम जो भी कह रहें हो वो सब तो ठीक है एफेसियस लेकिन शहजादें क्रैथेसियन की बात अलग है वो भोले - भाले और मासूम है और शाह - ए - रोम सल्तनत की बेहतरी के लिये वो हर पल शहजादें के साथ रहेंगी क्योंकि वो जानती है की , अगर वो साथ रहीं उनके तो शहजादें यह सल्तनत भी सम्हाल पायेंगे और तख्त - ओ - ताज की हिफाजत भी अच्छी तरह से कर पायेंगे । आहन्ना के पास आते है क्रैथेसियन और पूछने लगते है उनकी यूँ परेशान चहलकदमी को देखकर - क्या हुआ आप इस तरह से परेशान क्यों है ? तो आहन्ना उनकी तरफ देखकर कहने लगती है - हमारी परेशानी का सबब यह है की , हमें समझ नहीं आ रहा की , अब आगे क्या करना है क्योंकि जिंदगी इस तरह से तो नहीं जी जा सकती ना क्योंकि आगे की जिंदगी के लिये कुछ तो सोचना ही पडता है इस तरह से हाथ पर हाथ धरकर तो नहीं बैठा रहा जा सकता ना तो यह सुनकर क्रैथेसियन भी सोच में डूब जाते है । आहन्ना

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    चित्रांगना

    जल्दी से घर पहुंचती है और नीचे देखती है की , मर्तबान फलों और मेवों के सामान मसाले और जवाहरात के डिब्बों को खाविन्द नीचे के गोदाम में से निकाल - निकालकर बग्घी में रख रहें थे और वो ऊपर चढ जाती है । अबु और रूखसार बरामदें में खडे उसी का इंतजार कर रहें होते है मिलकर जाने के लिये और उन्हें देखकर आहन्ना पूछने लगती है , यह इतने सारे सामान कहाँ ले जायें जा रहें है ? तो रूखसार कहने लगती है - कल बताया तो था आपको की , हम रूबैन के ससुराल जा रहें है वो क्या है इन्होंने कहा की , यह तो अपनी बहन के ससुराल नहीं जा पायेंगे तो हम अबु को लेकर ही चलें जायें आखिरकार वो भी तो इनकी ही बेटी है तो और इब्राहम अबु कहते है - वैसे भी बेटी के ससुराल खाली हाथ नहीं जाया जाता तो आहन्ना कुछ याद करती हुयी कहने लगती है - सही कहा नाना श्री और नानी श्री भी जब भी घर आते थे कभी भी खाली हाथ नहीं आते थे और बेटियों के लिये ईश्वर ही अपने खजाने खुलें रखते है और उनके लिये जितना भी किया जायें कम होता है । हम सब उन्हें मना करते तो यही जवाब देते और यह कहकर सही बता देते की , दामाद भी तो बेटा ही होता है तो फिर उसके लिये भी तो सोचना ही होगा तो अबु आहन्ना के सर पर हाथ रखकर कहने लगते है - सही कहते थे वो लोग इसीलिये तो हम भी अपनी बेटी के ससुराल खाली हाथ नहीं जा सकते ना । आहन्ना भावुक हो जाती है और उनसे लिपटकर रो पडती है तो वो उसे सम्हालतें हुए कहने लगते है - इसमें रोने वाली क्या बात है ? हम कौनसे किसी सफर पर जा रहें है बस जल्दी ही लौटकर आयेंगे लेकिन जब लौटेंगे तो बहुत सारी खुशीयां और अच्छी खबर लेकर ही लौटेंगे और अगली बार आपको भी साथ लेकर ही जायेंगे तब तक अपना और मेन्शिया आप इनका ख्याल रखिएगा । सब तट पर आ पहुंचते है और जहाज में बैठने से पहले औनियोन और एफेसियस उन दोनों से कहने लगते है - आप लोग इत्मिनान से बेफिक्र होकर अपने सफर पर जाइये और यहाँ के बारे में परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि हम सब मलिका आहन्ना और मेन्शियां का ख्याल रखेंगे