• sujata_writes 49w

    मित्रता

    कुंद होती जा रही है
    मानसिकता हमारी
    और आपकी भी।

    मित्रता को सिमटाते
    जा रहे हैं हम
    बेवजह की
    बातों पर
    जिसके नहीं है कोई
    मायने

    कोई "आप"
    कोई 'कांग्रेसी"
    कोई "बीजेपी"
    का है समर्थक
    नहीं मिलते विचार
    किसी के भी
    इक दूसरे से

    लाजमी है विचारों
    का नहीं मिलना
    क्योंकि
    अलगाव पैदा करती
    है यह पार्टियां
    हमारे और आपके बीच

    हम फंसते चले
    जाते है निरंतर
    बिन यह विचारे की
    अंततः काम
    आती है
    मित्रता ही
    ना की
    कोई राजनितिक पार्टी।

    आपकी जरूरत उन्हें
    तब तक हीं है
    जब तक हैं
    आप काम के
    वरना
    फिर बन के रह
    जाएंगे आप
    खबर
    रद्दी अखबार के।

    तो क्यों ना
    राजनीति
    से अलग कर
    संभाला जाए उन रिश्तों को
    जो आपके
    लिए तब भी खड़ा था
    जब आप
    आदमी थे नाकाम के।।

    @sujata_writes