• philosophic_firefly 5w

    चाहत

    उन उम्मीदों की सिलवटों को छूकर के
    मैंने उदासी के रोशन चेहरे से गुफ्तगू की है

    मैंने नमुकम्मल लोगों के छोटे छोटे किरदारों से
    उम्र भर की जिल्लत और रुसवाई हासिल की है

    जो थे खुशबू से भरे प्यारे प्यारे दिल के टुकड़े मेरे
    मैंने गुमराह होकर उन्ही के रिश्तों से खुदकुशी की है

    अंधेरों से भी वीरान गुनाहों का मज़ा चख के
    मैंने एक तितली के ख्वाबों से मोहब्बत की है

    अब ये इल्जाम नहीं जाता, कुछ भुलाया नहीं जाता
    उस एक शख्स को जिसकी मैंने ताउम्र चाहत की है


    ©philosophic_firefly