• classii_mashmallow 35w

    #Justice_ for_ASIFA

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    क्या थी तू हिन्दू , क्या थी तू मुसलमान
    जब बात तेरी आबरू पर आयी तो सारे भूल गये ना तेरी पहचान

    क्यो रे

    तू कैसे भूल गयी अपनी पहचान
    क्यो टेक दिये तूने अपने घुटने और बन गयी उन भूखे दरिन्दों का शिकार

    तू करती भी क्या
    कुछ ना सूझा होगा तूझे उस समय
    इसलिए छोड़ दी होगी तूने अपनी सारी आस

    जिस्म को तेरे जानवरों की तरह नोच खाया
    अपनी झूठी शान के लिए तेरा गला दबाया

    आज बनी तू असीफा
    कल थी तू निर्भया

    तेरी मौत से ना ठहरा यह तमाशा , ना ठहरा यह सिलसिला

    तेरे रोने की आवाज़ उनके कानों तक ना पड़ीं
    तेरे आँसूओ से उनकी भूख ना मिटटी

    तू चीख रही थी
    तू चिल्ला रही थी
    ना थी जिस दर्द की हकदार उसे सह रही थी

    अब पूछती हूँ उन हैवानो से
    क्या था तेरा कसूर , क्या था तेरा गुनाह
    लड़की होना ही था क्या तेरा पाप

    अगर नहीं चाहती है तू बनना
    फिर से कोई असीफा , फिर से कोई निर्भया

    तो तूझे ही लेना पड़ेगा रूप काली का
    तूझे ही बनना पड़ेगा चंडीका...............

    ©words_by_riya