• shraddhakavedii 5w

    Dedicated to and Edited by the #TheOneWhoAlwaysShines

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    ।।साथ।।

    मैं रात की मुसाफिर,
    तू चाँद सा साथ चलता साया।
    जो दिन की भौंर फूटी,
    तू सूरज के तेज सा जगमगया।।

    बीच समंदर लहरों से जब जूझि मैं,
    तू साहिलों सा बीच मझदार में आया।
    फिर कदम जो बढ़ाये अकेले मैंने,
    तू ज़िन्दगी भर का साथ निभाने चला आया।।

    मेरे साथी, मेरे हमदम, मेरे हमसाया,
    क्या एक इत्तेफ़ाक़ से मैंने तुझे है पाया?
    या तू वो अरसे से पड़ी अधूरी ख्वाइश है,
    जिसे अब खुदा ने है मुकम्मल कराया।।



    ©shraddhakavedii