• priyanshu93 22w

    बिन यादों के शामें न होती
    होती न अगर यादें तो कभी किसी से बातें न होती
    बिछड़ गए वो भी एक एक करके हमसे जिनसे रोज मुलाकातें खास हुआ करती थी
    नफरत हो चली है अब तो जिंदगी से
    जाने क्या सोचकर बनाने वाले ने मेरी मिट्टी ख़राब की
    उसके पैरों की धूल ही बना देता जिसको बनाने वाले तूने

    माँ

    की उपाधि दी
    होकर के बेजान जीता हूँ
    हूँ इंसान इसलिए थोडा बनकर शैतान जीता हूँ
    तुझसे छुपा तो कुछ् नहीं फिर भी याद बताता हूँ

    तेरे इस जहाँ मैं, मै करके अफ़सोस हर रोज जीता हूं ।


    ©priyanshu93