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    दिन रात हमारे

    धरती पे तो दिन है रात है बारह बारह घंटे का
    हमने अपने कर्म और सोना जागना बाँट लिए

    चाँद पे पखवारे का दिन पखवारे की रात भी है
    अपने उत्सव के जोड़ इसके झोले में डाल दिए

    और ये जो सूरज है ! बेहिसाब रौशनी देता हमें
    हिसाब लो जरा, इसमें दिन कब, कब रात है ?