• groovyangel 10w

    ||मेरे सपने लेखन तक||
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    ये कविता मैंने कक्षा 12 में , स्कूल में लिखी थी , क्योंकि मुझे उस वक्त कोई समझ नहीं रहा था।
    ये बस मेरी भावनाएं थी , जो मैंने उस वक्त कक्षा में बैठ कर काग़ज़ पर व्यक्त करी थी ।

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    मेरे सपने मेरे कहां है ,
    लोग इसे अपना बनाते ।

    मेरा जीवन मेरा कहां है ,
    लोग इसे है जीना चाहते ।।

    पापा कहते है बीटेक कर ले ,
    मां कहती है इंजीनियर बन ले ।
    कोई मुझसे ये नहीं कहता ,
    जो तू चाहे वो तू कर ले ।।

    मैंने मां को बोल दिया था ,
    अब मैंने खुद के सपनों को पहचाना है ।
    मुझको जीवन में लेखक बन के ,
    ज़िन्दगी में आगे जाना है ।।

    पापा कहते है ,
    लेखक बनके कहीं नहीं जा पाओगी ।
    मां कहती है , पापा की बात मानोगी तो
    खूब नाम कमाओगी ।।

    मैंने पापा को बहुत समझाया ,
    मैंने मां को खूब मनाया ,
    सोचा दी से जाकर बोलूंगी ,
    पर कोई मुझे समझ ही नहीं पाया ।

    मैंने कहा ,
    विज्ञान में मेरी कोई रुची नहीं ।
    जिसमें रुची नहीं ,
    वह मुझे सूझी नहीं ।।

    पर मेरी कहां कोई सुनने वाला ,
    न था कोई समझने वाला ,
    फिर मैंने भी थी ठान ली ,
    न बीटेक , न इंजीनियर ।

    मेरी लेखन में रुची है ,
    जिसमें रुची है , वही मुझे सूझी है ।।

    - अदिति त्रिपाठी
    ©groovyangel