• goldenwrites_jakir 5w

    उम्र की देहलीज पर दोनों चिराग बुझने को है
    एक दिल धड़कन अनेक सब की सब थमने को है

    दुआ अब करती नहीं वो मेरी हिफाजत की
    अब मेरी जिंदगी पर नजर लगने को है ,,,

    फिज़ाओ से अब महक आती नहीं
    दरख़्त इश्क़ का पतझड़ होने को है

    भीग गई पलकें तेरी आहट तेरी परछाई का एहसास ना मिला
    हिचकियो के आसमां से बरसात अब ना होने को है ..।।


    ©goldenwrites_jakir