• happiee_soul 9w

    इस जग में जितने जुल्म नहीं,
    उतने सहने की ताकत है
    तानों के शोर में रहकर भी
    सच कहने की आदत है ।।

    मैं सागर से भी गहरा हूँ.
    तुम कितने कंकड़ फेंकोगे ।
    चुन-चुन कर आगे बढूँगा मैं...
    तुम मुझको कब तक रोकोगे..॥

    झुक-झुककर सीधा खड़ा हुआ,
    अब फिर झुकने का शौक नहीं..
    अपने ही हाथों रचा स्वयं
    तुमसे मिटने का खौफ़ नहीं...

    तुम हालातों की भट्टी में,
    जब-जब भी मुझको झोंकोगे...
    तब तपकर सोना बनूंगा मैं...
    तुम मुझको कब तक रोकोगे.
    तुम मुझको कब तक रोकोगे...।।
    ©k_arora