• paras18 5w

    सफ़र

    मुझे ग़रूर है अपने आप यें
    शायद मैं मजबूर हु वक़्त से
    वो मेरे साथ है या नहीं waqt बतायेगा
    पर ये इंसान अपनी मज़ार का रास्ता निभायेगा
    कोई साथ दे या दे
    पर जो साथ है मैं सूक्रगुज़र हूँ
    मुसाफ़िर हु एक दिन सफ़र ख़त्म होगा
    मज़ार पे कान आयेगा पता नहीं
    पर मज़ार तक का रास्ता हँस के गुजरंगौ
    ये वादा है अपने आप से
    कभी कभी अपना साया भी साथ नहीं डेटावर्ग
    दूसरों से उमीद करना मुसकिल है
    अकेले है अकेले रहेंगे और अकेलेजाएँगे