• kamal_komey 22w

    इश्क़ बाज़ारू हो चला
    कभी सरकारी नौकरी
    तो कभी रईस घरानें का हो चला
    तो कहीं खूबसूरती
    अपनी क़ीमत रखने लगा

    हम तो शायर थे ज़नाब न रईसी थी न नौकरी
    तो कहां ये मुक़म्मल होनें था सो अधूरा छोड़ चला
    ©joshi_02