• priyanshu93 22w

    मुसाफिर ऐ जिंदगी

    मजधार के उस मुसाफिर की तरह जिंदगी हो चली है
    कश्ती समुन्दर मैं है दरिया भी पास है लेकिन बुझाने को प्यास इस मुसाफिर की 2 बूँद पानी की तलाश है

    उस कब्र के इंसान की तरह जिंदगी हो चली है अब तो मेरी
    जीने को साँसें तो बाकि हैं लेकिन फिर भी 2 पल की हवा की तलाश है

    बनाकर के राह यूँ तो थोडा चला हूँ
    किस तरह बयां करूँ किस कदर अपनों से टुटा हूँ

    इस कदर बेबस हो चली है अब तो जिंदगी मौत सामने हा और उन्होंने सजाये ऐ जिंदगी की सजा दी है अपनी खातिर जीने की।

    ©priyanshu93