• bhartidabas 31w

    कई दफा सोचा के तुम्हारे लिए एक कविता लिखू , माँ |
    कल रात २ बज गए मेरी डायरी के साथ ,
    तुम्हारे अक्ष को कागज़ के पन्नो पर उतरना चाहती थी |
    मगर नाकाम रही, 
    ख्याल आया के , तुम्हारे प्यार, ममता भरे सारे एहसास, 
    वो दुलार जो तुमने मेरे लिए दिखाए है , 
    उन्हें कोरे पन्नो पर स्याही की ज़ंजीरो से जकड देना,
    शायद ठीक नहीं |
    जस्बात, 
    कुछ तुम्हारे और कुछ मेरे , 
    खुली हवा में साँस लेते ही अच्छे लगते है |
    तुम्हे किसी कविता में उतरने की ज़रुरत नहीं |
    तुम मेरी ज़िन्दगी की वो खूबसूरत ग़ज़ल हो, 
    जो मुझमे झलकती है |
    मेरे हर ज़ज़्बातो में , खयालो में, 
    सारे एहसासो में पनपती है |
    माँ , तुम्हारी खुशबू मेरी साँसों में हर पल महकती है |
    मेरे सीने में जलती लौ हो तुम ,
    जो अक्सर अँधियारो में मेरा साथ निभाया करती है |
    मुझे रास्ता दिखाया करती है |

    ©bhartidabas