• rjmanjeri 70w

    स्नेह

    "कभी कभी अनछुआ स्नेह पाकर तुम्हारा,
    पुलकित हो उठता है तब दिल हमारा,
    आशाओं के विपरीत उतर कर ,
    तुम मेरे मन के आंगन में,
    क्यों ना रोज़ रोज़ अपने स्नेह को बिखराओ।"
    ©Rj Manjeri